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The Mughal Invader : Babur

We shall refer to the English translation of Babur Nama through Annette Susannah Beveridge posted in 1922. This translation was once completed without delay from some thing parts of unique Turkish manuscript had been available. These suffice to set up the proper persona of Babur. Babur – the gay drunkard toddler molester The autobiography simply establishes Babur as a compulsive gay infant molester. So these defending Babri Masjid ought to first definitely give an explanation for if Islam justifies homosexuality and child-molestation. If not, Babur used to be a shame in identify of Islam and as a result any shape developed by means of him is additionally a shame in title of Islam. 1. In Page 120-121 of the biography he says that he was once no longer lots fascinated in his spouse however was once maddened by means of a boy named Babri. He confesses that he had now not cherished every person like he used to be mad for this boy. He used t

SCHRODINGER, THE FATHER OF QUANTUM PHYSICS AND VEDANTA

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In the past century, two giants among men , drank deeply from the wisdom of Indian Vedas and Upanishads ( Vedanta ) and changed classical science for ever. One was Nikola Tesla , a super genius Serbian and the other was Erwin Schrodinger an Austian Irish physist who won the Nobel prize. Both of them were more intelligent that Albert Einstein. Both knew by instinct,  that the ancient Indian seers with 12 strand DNA and king sized pineal glands, did not need to write down Mathematical equations. They figured it all in their great minds. ( Enter the name "Shakuntala Devi" --  in Google search, who went to the West and demonstrated the speed of 9000 year old Vedic mathematics-- only then you will believe  ) Both wanted some  “Some blood transfusion from the East to the West” to save Western science from spiritual anemia.” Nikola Tesla was introduced to Vedanta by Swami Vivekanda , the great Indian mystic. Tesla invented AC electricity and lit up the world. He und

ईशावास्योपनिषद(Ishavasya Upanishad) भाग -एक

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वह सच्चिदानंद  परब्रह्म  पुरुषोत्तम  सब प्रकार से सदा - सर्वदा  परिपूर्ण है।    यह जगत भी उस परब्रह्म से पूर्ण ही है ,क्योंकि यह उसी पूर्ण  पुरूषोत्तम से ही उतपन्न हुआ है।                                                                      विश्व में जो कुछ भी यह चरचरात्मक जगत तुम्हारे देखने -सुनने में आ रहा है सब -का -सब  सर्वाधार ,सर्वनियन्ता ,सर्वाधिपति ,सर्वशक्तिमान ,सर्वज्ञ  परमेश्वर से  व्याप्त है।                                                                                                                                                                                         ऐसा समझकर  उन परमेश्वर को निरंतर अपने साथ रखते हुए ,सदा -सर्वदा उनका स्मरण करते हुए तुम इस जगत में त्यागभाव से केवल कर्तव्यपालन के लिए ही  विषयो का यथा विधि उपभोग करो अर्थात  विश्वरूप ईश्वर की पूजा के लिए ही कर्मो का आचरण करो।  विषयो में मन को मत फसने दो ,यही कल्याण का मार्ग है।    ये भोग पदार्थ किसी के भी नहीं है।                                                                                  

सूर्य नमस्कार

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"ॐस्वस्तिश्री***सूर्य नमस्कार" सूर्य नमस्कार का सरल अर्थ है 'सूर्य को प्रणाम।  वैदिक युग के प्रबुद्ध ऋषियों द्वारा सूर्य नमस्कार की परम्परा हमें प्राप्त हुर्इ है।  सूर्य  आध्यातिमक चेतना का प्रतीक है। प्राचीन काल में दैनिक सूर्योपासना का विधान नित्य-कर्म के रूप में था। योग में सूर्य का प्रतिनिधित्व पिंगला अथवा सूर्य नाड़ी द्वारा होता है। सूर्य नाड़ी प्राण-वाहिका है, जो जीवनी- शक्ति वहन करती है। गतिशील आसनों का यह समूह हठयोग का पारम्परिक अंग नहीं माना जाता है, क्योंकि कालान्तर में मौलिक आसनों की श्रृंखला में इन्हेंसमिमलित किया गया था। यह शरीर के सभी जोड़ों एवंमांसपेशियों को ढीला करनेतथा उनमें खिंचाव लाने और आंतरिक अंगों की मालिश करने का एक प्रभावी ढंग है। इसकी बहुमुखी गुणवत्ता और उपयोगिता ने एक स्वस्थ, ओजस्वी और सक्रिय जीवन के लिए तथा साथ- ही आध्यातिमक जागरण और चेतना केविकास के लिए एक अत्यन्त उपयोगी पद्धति के रूप में इसेस्थापित किया है। सूर्य नमस्कार योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है। सूर्य नमस्कार में बारह मंत्र उचारे जाते हैं। प्रत्येक मंत्र में सूर्य का भिन्न नाम ल

नवरात्र का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक रहस्य

नवरात्र शब्द से नव अहोरात्रों (विशेष रात्रियां) का बोध होता है। इस समय शक्ति के नव रूपों की उपासना की जाती है। 'रात्रि' शब्द सिद्धि का प्रतीक है। भारत के प्राचीन ऋषियों-मुनियों ने रात्रि को दिन की अपेक्षा अधिक महत्व दिया है, इसलिए दीपावली, होलिका, शिवरात्रि और नवरात्र आदि उत्सवों को रात में ही मनाने की परंपरा है। यदि रात्रि का कोई विशेष रहस्य न होता, तो ऐसे उत्सवों को रात्रि न कह कर दिन ही कहा जाता। लेकिन नवरात्र के दिन, नवदिन नहीं कहे जाते। मनीषियों ने वर्ष में दो बार नवरात्रों का विधान बनाया है। विक्रम संवत के पहले दिन अर्थात चैत्र मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (पहली तिथि) से नौ दिन अर्थात नवमी तक। और इसी प्रकार ठीक छह मास बाद आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से महानवमी अर्थात विजयादशमी के एक दिन पूर्व तक। परंतु सिद्धि और साधना की दृष्टि से शारदीय नवरात्रों को ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया है।इन नवरात्रों में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति संचय करने के लिए अनेक प्रकार के व्रत, संयम, नियम, यज्ञ, भजन, पूजन, योग साधना आदि करते हैं। कुछ साधक इन रात्रियों में पूरी रा

श्रावण मास और रमजान

1. श्रावण मास शिव जी को समर्पित है और इस पवित्र माह में पार्वती जी भगवान शंकर जी से राम जी के जीवन चरित्र को सुनती (श्रवण) करती हैं | 2. इसी राम कथा के सुनने और सुनाने (श्रावण) की परिपाटी में इस पवित्र माह को"श्रावण"कहा गया है | और विश्व भर के हिन्दू इस माह में सत्य नारायण की कथा और राम चरित मानस का पाठ करते हैं | 3. वास्तव में गोस्वामी जी विरचित श्री राम चरित मानस में मास परायण का विश्राम भी इसलिए ही होता है | और इस दिव्य पुस्तक का नाम भी मानस इसलिए है की अपने मानस में बसे राम के चरित्र को शंकर जी माता पार्वती को सुना रहे है | उदहारण : चौपाई में बहुत से स्थानों पर पार्वती का संबोधन जैसे "उमा राम सुभाऊ जेहि जाना", "उमा जे राम चरन रत बिगत काम मद क्रोध", "उमा राम की भृकुटि विलासा", "उमा न कछु कपि कै अधिकाई" अदि अदि 4. आप सभी पाठकों से निवेदन है की सावन के इस पवित्र माह में आप भी राम जी के जीवन को पढ़ें और जानें किसी भी भाषा में | इन्टरनेट पर भी आप को राम चरित मानस मिल जाएगा | 5. आप अपने मोबाइल के एंड्राइड ऐप और एप्पल पर भी कितने एप्लीकेशन

Ramanathapuram district, 527 km south of Chennai

Ramanathapuram district, 527 km south of Chennai, which houses Rameswaram Temple and many holy shrines, is getting out of bound for outsiders. Local Jamaath Councils have issued ‘fatwas’ declaring Muslim-majority villages out of bound for people even from the district itself. Entrances to Athiyuthu, Puthuvalassai, Panaikulam, Azhagankulam and Sitharkottai sport such boards, all put up by the local Jamaath Councils. “There are boards deep inside these villages which declare outsiders are not allowed,” said B Arumugam, who acted as a guide to this correspondent. Interestingly, all these villages have a strong Muslim population. “Advertising (banners, posters and pamphlets) and honking (from vehicles) without permission is prohibited inside the Panchayath. By Order - Muslim Jamaath Thajul Islam Sangh, Pottakavayal”, is the board which welcomes the visitor to the village entrance on the Attrankarai Road, hardly 10 kilometre from Ramanathapuram town. “For the last 20